Marudhara Today

अरावली की परिभाषा और संरक्षण को लेकर अजमेर में हुई व्यापक जनसुनवाई

अरावली की परिभाषा और संरक्षण को लेकर अजमेर में हुई व्यापक जनसुनवाई

उच्चतम न्यायालय की उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने खनन, पर्यावरण, आजीविका एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े हितधारकों को सुना

खनन व्यवसायियों, श्रमिकों, पर्यावरणविदों, पशुपालकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने दिए महत्वपूर्ण अभ्यावेदन

 

अजमेर : 9 अगस्त 2026

 

 उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की जनसुनवाई रविवार को जवाहर रंगमंच अजमेर में सम्पन्न हुई। जनसुनवाई में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा, पारिस्थितिक अखंडता एवं संरक्षण के साथ-साथ खनन, आजीविका और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पक्षों को सुना गया।

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माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्वप्रेरित रिट याचिका (सिविल) संख्या 10/2025 में 25 मई 2026 को पारित आदेश के तहत अरावली पहाड़ियों एवं श्रृंखलाओं की परिभाषा, उनकी पारिस्थितिक अखंडता तथा संरक्षण के आकलन के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। समिति को विभिन्न हितधारकों से परामर्श के पश्चात 31 अगस्त 2026 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

जनसुनवाई की अध्यक्षता समिति की अध्यक्ष एवं महानिदेशक, भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद कंचन देवी ने की। सदस्य सचिव एवं उप महानिरीक्षक वन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय अमित आनंद सहित समिति के सदस्य डॉ. सुभाष आशुतोष, पूर्व महानिदेशक, भारतीय वन सर्वेक्षण डॉ. राजेन्द्र कुमार शर्मा, पूर्व निदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण बृजमोहन सिंह राठौड़, पूर्व संयुक्त सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय प्रो. अशोक भटनागर, प्रो. जगदीश कृष्णास्वामी तथा प्रो. लक्ष्मीकांत शर्मा उपस्थित रहे।

जनसुनवाई में मकराना, अजमेर, नागौर, बारां, ब्यावर, सावर, जयपुर एवं नाथद्वारा सहित विभिन्न क्षेत्रों से पर्यावरणविद, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, खनन पट्टाधारी, खनन व्यवसायी, खान श्रमिक, स्टोन क्रेशर संचालक, लघु उद्योग प्रतिनिधि, पशुपालक तथा स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समिति के समक्ष 16 वक्ताओं ने अपने विचार रखे, जबकि अनेक प्रतिभागियों द्वारा लिखित अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किए गए।

जनसुनवाई में खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक एवं उत्तरदायी खनन, सिलिकोसिस से प्रभावित श्रमिकों की समस्याओं, पर्यावरण एवं जीव संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, अरावली के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व, अरावली की परिभाषा, पशुपालकों की आजीविका, मकराना क्षेत्र में खनन एवं रोजगार, खनन से राज्य को प्राप्त राजस्व, लघु उद्योग एवं स्टोन क्रेशर संचालन तथा वृहद खनन उद्योगों से जुड़े विषयों पर पक्ष रखा गया।

खनन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने समिति के समक्ष कहा कि अरावली का संरक्षण आवश्यक है और इस संबंध में किसी प्रकार का मतभेद नहीं है। अरावली पश्चिम से आने वाली रेत को रोकने, भूजल पुनर्भरण तथा वन्यजीवों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मुख्य प्रश्न अरावली के संरक्षण का नहीं, बल्कि यह निर्धारित करने का है कि धरातल पर अरावली की वास्तविक सीमा कहां तक है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि केवल ढाल (स्लोप) के आधार पर निर्धारित किए गए पॉलीगॉन कई स्थानों पर कृषि भूमि, रेत के धोरों, ओवरबर्डन डंप तथा समतल क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहे हैं। नागौर पट्टी की पहाड़ियों को उन्होंने मारवाड़ सुपरग्रुप के बिलाड़ा समूह से संबंधित पृथक अवसादी तंत्र बताते हुए इस संबंध में वैज्ञानिक आधार पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई।

जनसुनवाई में यह भी बताया गया कि अजमेर, ब्यावर, नागौर तथा डीडवाना-कुचामन जिलों में लगभग 77 हजार व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से तथा डेढ़ लाख से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से खनन गतिविधियों पर निर्भर हैं। खनन गतिविधियों से जुड़े रोजगार एवं आजीविका के इस पक्ष को भी समिति के समक्ष रखा गया।

जनसुनवाई में प्रमुख वक्ताओं में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के पूर्व प्राध्यापक सुशील भंडारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं सिलिकोसिस विषय के विशेषज्ञ भीम (ब्यावर) के शंकर सिंह देवडूंगरी, आरएसएमएमएल नागौर के ए.के. जायसवाल, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड कायड़ अजमेर के अजानगिरी, पर्यावरण एवं जीव संरक्षण समिति के आशियाना पंछी, शाहबाद घाटी संरक्षण समिति बारां के प्रशान्त पाटनी, जयपुर स्टोन क्रेशर एसोसिएशन के पवन शर्मा, अरावली के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व के प्रतिनिधि भंवर मेघवंशी, लघु उद्योग भारती जयपुर के तेज सिंह, न्युवाको सीमेन्ट लिमिटेढ नागौर के जय सिंह, खनन व्यवसायी जैतारण के रतन लाल बागड़ी, खनन व्यवसायी मकराना के आगू राम आबला सहित विभिन्न क्षेत्रों के एनजीओ, खनन क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अरावली की परिभाषा से जुड़े विषय पर कविता श्रीवास्तव, अरावली क्षेत्र में पशुपालकों और उनकी आजीविका के विषय पर शशि मीणा तथा मकराना में खनन पर चर्चा, अरावली पर उसके प्रभाव पर अधिवक्ता मकराना शुभव माहेश्वरी, राजस्थान में खनन से होने वाले राजस्व पर चर्चा एवं बजट विश्लेषण व शोध से जुड़े नेसर अहमद ने अपने विचार रखे।

जनसुनवाई में जिला कलक्टर लोक बंधु, निदेशक खान एवं भू विज्ञान विभाग एम.पी. मीना, अतिरिक्त निदेशक खान बी.एस. सोढ़ा, अतिरिक्त जिला कलक्टर नरेंद्र मीना, वरिष्ठ खनि अभियंता जय गुरबक्षाणी, उपखण्ड अधिकारी अजमेर पदमा देवी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी निधि खण्डेलवाल, वन विभाग के एसीएफ विभा चौधरी सहित खनि अभियन्ता एवं सहायक खनि अभियन्ता कार्यालयों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त वन एवं पर्यावरण विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भी जनसुनवाई में भाग लिया।

 

समिति ने जनसुनवाई में प्रस्तुत सभी मौखिक एवं लिखित अभ्यावेदनों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। समिति ने बताया कि जो व्यक्ति अथवा संस्था जनसुनवाई में उपस्थित नहीं हो सकी है, वह अपना लिखित अभ्यावेदन समिति के सदस्य सचिव को ई-मेल mshpcaravalli@gmail.com पर भेज सकती है। अजमेर में जनसुनवाई के पश्चात समिति राजसमन्द एवं उदयपुर के लिए रवाना हुई। इन क्षेत्रों में क्षेत्रीय भ्रमण के साथ हितधारकों से संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

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