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“ॐ त्रिकोण : चेतना की अनंत यात्रा”

“ॐ त्रिकोण : चेतना की अनंत यात्रा”

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डॉ. अभिनव कमल रैना

अध्यक्ष, आर्ट लिटरेचर एंड कल्चरल फाउंडेशन, अजमेर

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यह अमूर्त चित्र एक गतिशील दृश्य यात्रा को प्रस्तुत करता है, जिसमें बहती हुई रेखाएँ, रंगों का प्रवाह तथा ऊर्जा से भरे हुए रूप चेतना के निरंतर विस्तार और विकास का प्रतीक हैं। नीले, नारंगी, लाल तथा श्वेत रंगों का समन्वय मानव अस्तित्व के विभिन्न आयामों—मन, ऊर्जा, भावनाओं और आध्यात्मिक जागरण—को दर्शाता है।

चित्र के केंद्र में स्थित त्रिकोण के भीतर अंकित “ॐ” इसकी मुख्य आत्मा और केंद्र बिंदु है। भारतीय दार्शनिक परंपरा में “ॐ” को आद्य ध्वनि अर्थात वह ब्रह्मांडीय कंपन माना गया है जिससे संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। वहीं त्रिकोण तीन मूलभूत सिद्धांतों की एकता का प्रतीक है:

सृजन – संरक्षण – परिवर्तन

शरीर – मन – आत्मा

भूतकाल – वर्तमान – भविष्य

चित्र में चारों ओर घूमती और प्रवाहित होती रेखाएँ ब्रह्मांडीय ऊर्जा तथा जीवन के चक्र को दर्शाती हैं। यह संकेत करती हैं कि जीवन स्थिर नहीं बल्कि निरंतर गतिशील और परिवर्तनशील है। विविध रंगों और आकृतियों का केंद्र की ओर प्रवाह बाहरी जटिलताओं से आंतरिक संतुलन और आत्मबोध की यात्रा को व्यक्त करता है।

त्रिकोण के चारों ओर स्थित श्वेत वृत्त पवित्रता, शांति और शुद्ध चेतना का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि जीवन की अनेक उलझनों और बाहरी अशांति के बीच भी मनुष्य के भीतर एक ऐसा केंद्र होता है जहाँ शांति, संतुलन और आत्मिक स्थिरता विद्यमान रहती है।

समग्र रूप से यह चित्र गति और स्थिरता, भौतिकता और आध्यात्मिकता तथा सीमित और असीम चेतना के मध्य संवाद को अभिव्यक्त करता है। यह केवल देखने का विषय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आंतरिक अनुभूति का आमंत्रण भी है। यह कलाकृति दर्शक को बाहरी संसार से भीतर की चेतना की यात्रा की ओर प्रेरित करती है, जहाँ व्यक्ति स्वयं को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ा हुआ अनुभव करता है।

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