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“एमडीएसयू में गुणवत्ता सुधार का नया अध्याय: NAAC A++ लक्ष्य के साथ व्यापक परिवर्तन की दिशा तय”

“एमडीएसयू में गुणवत्ता सुधार का नया अध्याय: NAAC A++ लक्ष्य के साथ व्यापक परिवर्तन की दिशा तय”

“शोध, नवाचार, हरित पहल और डिजिटल प्रबंधन के साथ वैश्विक पहचान बनाने की ओर अग्रसर विश्वविद्यालय”

किशनगढ़ मार्बल सेलरी के प्रभावी निष्पादन पर विश्वविद्यालय के पर्यावरण और सूक्ष्म विज्ञान विभाग शोध के लिए करेगा पहल

अजमेर : 02 अप्रैल 2026

 

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में आयोजित आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की बैठक ने विश्वविद्यालय के भविष्य की दिशा को स्पष्ट करते हुए एक व्यापक और दूरदर्शी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई है। कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न इस बैठक में विश्वविद्यालय को NAAC में A++ ग्रेड दिलाने के लक्ष्य के साथ शिक्षण, शोध, प्रशासन और नवाचार के क्षेत्रों में गहन मंथन किया गया। कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़ते हुए गुणवत्ता आधारित, नवाचार-प्रधान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप स्वयं को परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी घटकों को एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करना होगा, जहां गुणवत्ता केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक सतत संस्कृति के रूप में विकसित हो। इस बैठक में आर के मार्बल के सुभाष अग्रवाल, प्रो. सुब्रतो दत्ता और प्रो. आशीष भटनागर के बीच हुई चर्चा में किशनगढ़ मार्बल सेलरी के प्रभावी निष्पादन पर विश्वविद्यालय के पर्यावरण और सूक्ष्म विज्ञान विभाग शोध के लिए आगे बढ़ने पर चर्चा हुई

बैठक में IQAC की भूमिका को विश्वविद्यालय की गुणवत्ता प्रणाली के केंद्र में रखते हुए इसे और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। यह माना गया कि शिक्षण, शोध और विस्तार गतिविधियां ही किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान होती हैं, और इन तीनों क्षेत्रों में समन्वित सुधार के बिना उत्कृष्टता संभव नहीं है। इसी दृष्टिकोण के साथ एक ऐसी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जिसमें गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता निगरानी दोनों समान रूप से मजबूत हों।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। यह निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय में सेमेस्टर प्रणाली को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा तथा पाठ्यक्रमों को अधिक लचीला और कौशल आधारित बनाया जाएगा। मेजर-माइनर विषय संरचना के माध्यम से विद्यार्थियों को बहुविषयक शिक्षा प्रदान करने और उन्हें रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे SWAYAM के कोर्स को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना इस बात का संकेत है कि विश्वविद्यालय तकनीकी परिवर्तन को अपनाने के लिए तैयार है।
शोध के क्षेत्र में सुधार को बैठक की सबसे बड़ी प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया गया।

कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय का शोध प्रदर्शन अपेक्षित परिणामों से अभी दूर है, जो NAAC मूल्यांकन में एक महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है। इस स्थिति को बदलने के लिए शिक्षकों को उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों के लिए प्रेरित करने, फंडेड प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ाने और पेटेंट संस्कृति को विकसित करने पर बल दिया गया। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि शोध केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित न रहकर समाज और नीति-निर्माण में भी सार्थक योगदान दे।
बैठक में विश्वविद्यालय को एक हरित और सतत कैंपस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। “गो ग्रीन” पहल के अंतर्गत सौर ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन, कचरा प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण जैसे उपायों को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। पर्यावरणीय जिम्मेदारी को विश्वविद्यालय की मूल पहचान का हिस्सा बनाने का यह प्रयास न केवल अकादमिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिक्षण पद्धति में नवाचार को लेकर भी बैठक में व्यापक विचार-विमर्श हुआ। यह स्वीकार किया गया कि बदलते समय के साथ शिक्षा के तरीकों में भी बदलाव आवश्यक है। AI, केस स्टडी, प्रॉब्लम सॉल्विंग और वर्कशॉप आधारित शिक्षण को अपनाने से विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक और रचनात्मक क्षमता विकसित की जा सकती है। कुलगुरु ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि तकनीक को केवल एक उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए प्लेसमेंट, एलुमिनाई और स्टार्टअप से संबंधित पहल को भी प्राथमिकता देनी होगी |

विश्वविद्यालय स्तर पर प्लेसमेंट फेयर आयोजित करने, एलुमिनाई नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने जैसे निर्णय इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। स्थानीय उद्योगों के साथ सहयोग स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलेगा।
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू डॉक्यूमेंटेशन और प्रॉजेक्शन को लेकर सामने आया। कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि विश्वविद्यालय में अनेक सराहनीय कार्य हो रहे हैं, लेकिन उनका उचित रिकॉर्ड और प्रभावी प्रस्तुतीकरण नहीं हो पा रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए यह अनिवार्य किया गया कि प्रत्येक गतिविधि का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाए और उसे विभिन्न माध्यमों के जरिए प्रस्तुत किया जाए, ताकि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां व्यापक स्तर पर सामने आ सकें। प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया गया। डिजिटल सिस्टम के माध्यम से कार्यप्रणाली को अधिक सरल और प्रभावी बनाने, LMS को लागू करने तथा सुरक्षा और सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बैठक के समापन पर कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि योजनाएं तभी सार्थक होती हैं जब उन्हें पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस परिवर्तनकारी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं और विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना योगदान दें।


निदेशक प्रो. ऋतु माथुर ने बताया कि यह बैठक महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है, जहां से एक नई दिशा और नई ऊर्जा के साथ विश्वविद्यालय गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होता दिखाई दे रहा है। यदि निर्धारित रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो निकट भविष्य में यह विश्वविद्यालय न केवल NAAC A++ ग्रेड प्राप्त करेगा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
बैठक में प्रो. शिव प्रसाद – सदस्य (प्रबंधन अध्ययन विभाग), प्रो. सुब्रतो दत्ता – सदस्य (अध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग), प्रो. सुभाष चन्द्र – सदस्य (अध्यक्ष, प्राणीशास्त्र विभाग), डॉ. आशीष पारीक – सदस्य (प्रबंधन अध्ययन विभाग), प्रो. ऋतु माथुर – सदस्य (खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग), कुलसचिव कैलाश चन्द्र शर्मा – सदस्य, नियंत्रक परीक्षा डॉ. सुनील कुमार टेलर – सदस्य, रौनक चौधरी – सदस्य (पर्यावरणविद), डॉ. अनुप आत्रेय – सदस्य (पूर्व छात्र), हर्ष राय – सदस्य (पूर्व परियोजना निदेशक, आरएसआरडीसी), सुभाष अग्रवाल – सदस्य (चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर.के. मार्बल, किशनगढ़), प्रो. ऋतु माथुर – निदेशक एवं सदस्य सचिव (आईक्यूएसी) उपस्थित थीं | इसके अतिरिक्त प्रो.अरविंद पारीक, प्रो. आशीष भटनागर, प्रो.मोनिका भटनागर विशेष आमंत्रित के रूप में उपस्थित रहे |

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