महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में “आत्ममंथन दिवस” का आयोजन
Mohit Jain
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में “आत्ममंथन दिवस” का आयोजन
आत्ममंथन से संस्थागत उत्कृष्टता की ओर बढ़ेगा विश्वविद्यालय – कुलगुरु प्रो. अग्रवाल
अजमेर : 4 अगस्त 2026
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के 39वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत मंगलवार को “आत्ममंथन दिवस” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक विभागाध्यक्षों, वित्त नियंत्रक, परीक्षा नियंत्रक तथा विभिन्न प्रशासनिक अनुभागों के अधिकारियों ने विगत एक वर्ष की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं आगामी वर्ष की कार्ययोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया।
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कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि आत्ममंथन किसी भी संस्थान की प्रगति का आधार है। उपलब्धियों पर संतोष आवश्यक है, किन्तु निरंतर सुधार की प्रेरणा देने वाला रचनात्मक असंतोष ही उत्कृष्टता की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण, उत्तरदायित्व और भावी दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
कुलगुरु ने विश्वविद्यालय के तीन मूल दायित्व—ज्ञान का सृजन, ज्ञान का प्रसार एवं ज्ञान का अनुप्रयोग—को विश्वविद्यालय की समस्त शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षकों के साथ-साथ प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी इन उद्देश्यों की पूर्ति में समान रूप से सहभागी है।
विभागीय प्रस्तुतियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने आगामी वर्ष के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रवेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, बाह्य वित्तपोषित शोध परियोजनाओं, समाजोपयोगी एवं नीति-आधारित संगोष्ठियों, भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित अनुसंधान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, छात्र विविधता, परीक्षा सुधार तथा सकारात्मक कार्यसंस्कृति को विश्वविद्यालय की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग को केवल उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, समयबद्ध कार्ययोजना और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण के साथ कार्य करना चाहिए। विश्वविद्यालय की वास्तविक प्रगति सामूहिक उत्तरदायित्व, पारदर्शी प्रशासन, गुणवत्तापूर्ण शोध तथा नवाचार आधारित शैक्षणिक वातावरण से सुनिश्चित होगी।
कुलगुरु ने सभी शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे “संकल्प से सिद्धि” की भावना के साथ कार्य करें तथा व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सक्रिय योगदान दें।
कार्यक्रम के दौरान सभी विभागों एवं प्रशासनिक इकाइयों द्वारा प्रस्तुत सुझावों के आधार पर विश्वविद्यालय की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय भी लिया गया।