अजमेर में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस : 96 प्रजातियों की दर्ज हुई मौजूदगी
अजमेर : 15 जनवरी 2026
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पर्यावरण विज्ञान विभाग, द्वारा जिले में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के तहत सक्रिय रूप से सर्वेक्षण किया जा रहा है। यह गणना 3 जनवरी 2026 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है। यह एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य जलपक्षियों एवं आर्द्रभूमियों की स्थिति की निगरानी करना तथा इनके संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाना है। यह गणना प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर स्वैच्छिक सहभागिता से की जाती है।
आज 15 जनवरी को अजमेर की प्रमुख आर्द्रभूमि आनासागर झील पर जलपक्षी गणना की गई, जिसमें कुल 96 पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई। इस दौरान डल्मेशियन पेलिकन, ग्रेट व्हाइट पेलिकन, नॉर्दर्न शोवलर, रफ, ब्लूथ्रोट, पाइड बुशचैट सहित कई प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की मौजूदगी सामने आई।
वर्तमान में पर्यावरण विज्ञान विभाग की 15 सदस्यीय टीम अजमेर एवं आसपास की अन्य आर्द्रभूमियों में जलपक्षी गणना कार्य में लगी हुई है।
विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता ने बताया कि एशियन वॉटरबर्ड सेंसस जैसे कार्यक्रम आर्द्रभूमियों के स्वास्थ्य आकलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। “इस प्रकार के वैज्ञानिक सर्वेक्षण से न केवल जैव विविधता की वास्तविक स्थिति सामने आती है, बल्कि संरक्षण से जुड़ी नीतियों को भी मजबूती मिलती है,” ।
प्रो. प्रवीण माथुर ने कहा कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों की भागीदारी से यह अभियान और अधिक प्रभावी बन रहा है। “स्थानीय स्तर पर किए जा रहे ऐसे प्रयास भविष्य में आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए ठोस आधार तैयार करते हैं,”।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अजमेर जिले की झीलें और तालाब प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, और एशियन वॉटरबर्ड सेंसस से इनके संरक्षण की दिशा में अहम जानकारी प्राप्त हो रही है।




