Tuesday, February 3, 2026
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एमडीएसयू में शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाया गया

एमडीएसयू में शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाया गया

अजमेर : 21 जनवरी 2026

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर की सिंधु शोध पीठ द्वारा युवा क्रांतिकारी शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस आज श्रद्धा, सम्मान एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत–पाक युद्ध 1971 में भारतीय वायुसेना में सेवा देकर संग्राम मेडल से सम्मानित नायक रेखराज रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिंधु शोध पीठ के निदेशक प्रो. सुभाष चंद्र ने की।

मुख्य अतिथि नायक रेखराज ने अपने संबोधन में 1971 के भारत–पाक युद्ध के दौरान फाजिल्का बॉर्डर पर हुए संघर्षों का स्मरण करते हुए भारतीय सैनिकों की वीरता, साहस और पराक्रम का सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भारतीय सेना ने अदम्य साहस के बल पर पाकिस्तान को परास्त किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत गीत “ए मेरे वतन के लोगों…” गाकर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना विश्व की सबसे सशक्त सेनाओं में से एक है और देश सुरक्षित एवं मजबूत हाथों में है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुभाष चंद्र ने कहा कि शहीद हेमू कालानी विभाजित भारत के ऐसे युवा क्रांतिकारी थे जिन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में मातृभूमि की वेदी पर हँसते–हँसते अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1946 में ब्रिटिश सरकार ने हेमू कालानी को इसलिए फांसी दी क्योंकि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी सेना के ट्रूप एवं हथियारों से भरी रेल को रोकने हेतु रेल पटरियाँ उखाड़ने का साहसिक प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि हेमू कालानी जैसे युवा शहीदों के सपनों से प्रेरणा लेकर हम सभी को भारत को विश्व गुरु एवं विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

 

प्रो. सुभाष चंद्र ने कहा कि शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस धर्म, समाज और राष्ट्रभाव की एकता के साथ मनाया जाना चाहिए तथा उनकी गाथा से युवा पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि हेमू कालानी मात्र सात वर्ष की आयु से ही हाथ में तिरंगा लेकर अंग्रेजों के विरुद्ध नारे लगाते थे और किसी भी प्रलोभन अथवा प्रताड़ना से विचलित नहीं हुए। उनका एकमात्र सपना भारत की स्वतंत्रता था।

डॉ. राजू शर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि शहीद हेमू कालानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा और आदर्श हैं। उन्होंने युवाओं में “राष्ट्र प्रथम” की भावना जागृत करने का आह्वान किया तथा कहा कि भारतीय सेना के प्रत्येक सैनिक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपने अदम्य साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ माँ भारती की रक्षा के लिए सदैव संकल्पित है।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन सिंधु शोध पीठ के सचिव दिलीप शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. अशोक गुप्ता, नेहा दुबे, पंकज यादव, कंचन, शिखा सोनी, हेमा कंवर सहित अनेक शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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