Monday, May 18, 2026
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उदयपुर यूनिवर्सिटी के नवनियुक्त कुलगुरु प्रो. डागा और निवर्तमान कुलगुरु प्रो. सारस्वत का स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित

उदयपुर यूनिवर्सिटी के नवनियुक्त कुलगुरु प्रो. डागा और निवर्तमान कुलगुरु प्रो. सारस्वत का स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित

कर्मचारियों द्वारा गुड गवर्नेंस के “प्रो.सारस्वत मॉडल” की सराहना-विश्वविद्यालय के लिए बताया हितकारी

उदयपुर: 18 मई 2026

 

मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय उदयपुर के विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने नवनियुक्त कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ओर निवर्तमान कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत का स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर प्रोफेसर डागा का विश्वविद्यालय परिवार की ओर से स्वागत किया गया।

उन्होंने आशा व्यक्त कि, विश्वविद्यालय के मुखिया होने के नाते उनकी विश्वविद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी उनकी हमेशा प्राथमिकता रहेगी कि आपसी समन्वय से विश्वविद्यालय के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाए। उनका प्रयास रहेगा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा में अनुसंधान को और आगे बढ़ाया जाए।

 

कार्यक्रम में प्रो. बीपी सारस्वत द्वारा पिछले 7 माह में विश्वविद्यालय में किए गए नवाचार, कर्मचारी हित में लिए गए निर्णय, स्वच्छ अकादमिक वातावरण के निर्माण एवं गुड गवर्नेंस की प्रसंशा की गई।

इसी क्रम में नवनियुक्त कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा का स्वागत किया गया व आशा व्यक्त की गई कि जो व्यवस्था प्रो. सारस्वत द्वारा स्थापित की गई हैँ वह निरंतरता में जारी रहेगी। प्रो. डागा नवनियुक्त कुलगुरु द्वारा सभी को आश्ववस्त किया गया कि विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, अधिकारियो एवं कर्मचारियो को साथ लेकर सहयोग से विश्वविद्यालय में स्वच्छ अकादमिक एवं प्रशासनिक माहौल बनाएंगे एवं यही व्यवस्था (प्रो. सारस्वत मॉडल) निरंतरता में जारी रहेगी।

प्रभारी कुलगुरु प्रोफेसर बीपी सारस्वत के एमएलएसयू प्रभार के दौरान विकसित “प्रो. सारस्वत मॉडल” की सराहना विश्वविद्यालय हित में एक सकारात्मक एवं दूरदर्शी पहल के रूप में की जा रही है। नवाचार के इस मॉडल शैक्षणिक गुणवत्ता, अकादमिक और प्रशासनिक पारदर्शिता, विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विश्वविद्यालय परिवार का मानना है कि इस मॉडल के माध्यम से उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शोध गतिविधियों को प्रोत्साहन तथा कर्मचारियों-विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के मध्य समन्वय स्थापित कर विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में “प्रो. सारस्वत मॉडल” प्रभावी साबित हुआ है। शिक्षा जगत से जुड़े विभिन्न वर्गों ने भी इस पहल की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य विश्वविद्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।

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