Tuesday, February 3, 2026
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विश्व नम भूमि दिवस पर आनासागर झील किनारे बर्ड वॉक का आयोजन

विश्व नम भूमि दिवस पर आनासागर झील किनारे बर्ड वॉक का आयोजन

 

अजमेर : 02 फरवरी

विश्व नम भूमि दिवस के अवसर पर इको क्लब, पर्यावरण विज्ञान विभाग, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, सोफिया कॉलेज अजमेर एवं वन विभाग अजमेर के संयुक्त तत्वावधान में आनासागर झील के किनारे बर्ड वॉक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नम भूमि पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को समझाना तथा पक्षी विविधता के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था। बर्ड वॉक के दौरान प्रतिभागियों ने लगभग 80 प्रजातियों के स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों को देखा। इनमें जलपक्षी, शिकारी पक्षी एवं झील पारिस्थितिकी से जुड़े विशिष्ट पक्षी शामिल थे। प्रतिभागियों को पक्षियों के भोजन व्यवहार, प्रजनन आदतों, प्रवास चक्र और उनके प्राकृतिक आवास के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

 

इस शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का नेतृत्व पक्षीविद् डॉ. विवेक शर्मा ने किया। उन्होंने सरल और रोचक शैली में पक्षी पहचान की तकनीक, दूरबीन एवं फील्ड गाइड के उपयोग, तथा पक्षियों की पारिस्थितिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि पक्षी पर्यावरण स्वास्थ्य के संवेदनशील संकेतक होते हैं और उनकी संख्या में बदलाव पारिस्थितिक असंतुलन का संकेत देता है।

 

इस बर्ड वॉक में लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया और अनासागर झील के किनारे करीब 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। कार्यक्रम में सोफिया कॉलेज से डॉ. मृगांका उपाध्याय, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से रौनक चौधरी एवं निवेदिता शर्मा सहित वन विभाग की ओर से क्षेत्रीय वन अधिकारी जय सिंह चौधरी, सहायक वनपाल नीमा देवी, कद्दू चौधरी, महेश श्रीवास्तव, खेलो, वनरक्षक बच्छराज सिंह, शर्मिला, उमेद राम, निंबाराम गोदारा एवं चंद्रप्रकाश भी उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम से विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियो ने जाना कि नम भूमि जैव विविधता का महत्वपूर्ण आधार होती हैं। ये न केवल स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करती हैं, बल्कि भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण और स्थानीय जलवायु संतुलन में भी अहम भूमिका निभाती हैं। अनासागर जैसी शहरी झीलें बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में जीवनरेखा के समान हैं।

 

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने नम भूमि संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और प्राकृतिक जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया। विश्व नम भूमि दिवस के अवसर पर आयोजित यह बर्ड वॉक न केवल एक शैक्षणिक गतिविधि रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश भी बनकर उभरी।

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