शोधार्थी प्रतिभा सम्मान समारोह में सरकारी सेवाओं में चयनित शोधार्थियों का हुआ सम्मान
39वें स्थापना दिवस पर कुलगुरु बोले— “विश्वविद्यालय के ब्रांड एम्बेसडर हैं यहाँ के शोधार्थीविद्यार्थी”
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के 39वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सप्ताहव्यापी कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार को “शोधार्थी प्रतिभा सम्मान समारोह” का आयोजन किया गया। समारोह में राजस्थान लोक सेवा आयोग की आरएएस परीक्षा, सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा, विद्यालय शिक्षा विभाग सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में हाल ही में चयनित विश्वविद्यालय के शोधार्थियों का सम्मान किया गया। कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने सभी चयनित शोधार्थियों को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
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इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शोधार्थियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, सुदृढ़ अनुसंधान संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण अकादमिक वातावरण का भी प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि “आप सभी महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के ब्रांड एम्बेसडर हैं। आपकी उपलब्धियाँ देशभर में विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाती हैं। आपने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर सफलता अर्जित की है। भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट कार्य, नैतिक मूल्यों एवं दायित्वपूर्ण आचरण से विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करते रहें। आपकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।”
डीन छात्र कल्याण प्रो. सुभाष चंद्र ने चयनित शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के शोधार्थी आज अनुसंधान के साथ-साथ प्रशासनिक एवं शैक्षणिक सेवाओं में भी अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज सम्मानित हो रहे सभी शोधार्थी वर्तमान एवं भावी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और निरंतर परिश्रम किया जाए तो शोध कार्य और प्रतियोगी परीक्षाओं के मध्य भी उत्कृष्ट संतुलन स्थापित किया जा सकता है। उनकी उपलब्धियाँ अन्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करेंगी तथा उन्हें बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने की प्रेरणा देंगी।
निदेशक शोध प्रो. सुब्रतो दत्ता ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके शोधार्थियों की गुणवत्ता और उनकी उपलब्धियों से निर्मित होती है। उन्होंने कहा कि शोध केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टि, समस्या समाधान कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने की सशक्त प्रक्रिया भी है। विश्वविद्यालय का अनुसंधान वातावरण विद्यार्थियों को केवल उपाधि प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय एवं प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मानित शोधार्थी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देकर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करेंगे।
समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने चयनित प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय के मेधावी शोधार्थियों को सम्मानित करने के साथ-साथ अन्य विद्यार्थियों को अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा में प्रेरित करना रहा। 39वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित यह समारोह विश्वविद्यालय की शोध, शिक्षा और प्रतिभा सम्मान की गौरवशाली परंपरा का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
कार्यक्रम के अंत में सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मोनिका भटनागर ने सभी अतिथियों, चयनित शोधार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं उपस्थित विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सदैव प्रतिभा, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
यह सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के 39वें स्थापना दिवस समारोह की गरिमामयी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण आयोजन रहा, जिसने शोधार्थियों की उपलब्धियों का अभिनंदन करने के साथ-साथ उत्कृष्टता, अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया।